राज्य विधि आयोग की ओर से सरकार को सौंपे गए इस प्रस्ताव के तहत अगर कोई बुजुर्ग अपने वारिस की शिकायत करता है तो उसकी ओर से दी गई संपत्ति का बैनामा या दानपत्र निरस्त हो जाएगा. राज्य विधि आयोग ने इस बारे में अपने सुझाव राज्य सरकार को सौंप दिए हैं. विधि आयोग का कहना है कि अगर कोई बुजुर्ग यह शिकायत करता है कि उसका वारिस या उसकी संपत्ति पर काबिज संबंधित व्यक्ति उसकी सेवा नहीं कर रहा है तो उसको दी गई संपत्ति अब वापस ली जा सकेगी.
इस कानून के अस्तित्व में आने के बाद अब इस तरह की शिकायतों पर जिला प्रशासन की ओर से भी कार्रवाई की जा सकेगी. इस कानून में जिला प्रशासन को भी यह अधिकार होगा कि वो बुजुर्गों की शिकायत पर उनकी सहायता के लिए तत्काल कदम उठा सकेंगे. अभी तक की व्यवस्था में इस तरह की स्थिति में बुजुर्ग को कोर्ट की शरण लेनी पड़ती थी. जिला प्रशासन को कार्रवाई का अधिकार नहीं था.
सूत्रों के द्वारा मिल रही जानकारी के मुताबिक इस एक्ट में बुजुर्गों को जीवन और संपत्ति का संरक्षण दिए जाने का प्रावधान किया जाना है. इससे असहाय और बुजुर्ग व्यक्ति अपनी संपत्ति पर काबिज रिश्तेदारों को जीवित रहते बेदखल कर सकेंगे. गौरतलब है कि यूपी में बुजुर्गों के उत्पीड़न के मामले सामने आते रहे हैं. इस नए कानून के अस्तित्व में आते बुजुर्गों के ऊपर हो रहे अत्याचारों काफी हद तक कमी आएगी। प्रॉपर्टी की लालसा रखने वाले उनके बारिस पुत्र, पुत्रवधू या अन्य रिश्तेदार कम से कम उनका ख्याल रखेंगे।
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| फोटो क्रेडिट - गोरखपुर टाइम्स |


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