जालौन -( उरई ) प्रशासन कितने भी प्रयास कर ले अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए लेकिन करप्ट या ढुलमुल रवैये वाले कर्मचारियों के चलते अक्सर अपराधी सजा पाने से बच कर निकल जाते हैं । ऐसा ही मामला जालौन जिले के न्यायालय में सामने आया है। जहां कोर्ट में तैनात बाबू की बदौलत पिछले 10 वर्षों से 533 अपराधियों को सजा नहीं हो सकी । समग्र मामला जब सामने आया जब जिला जज अशोक कुमार ने न्यायालय का औचक निरीक्षण किया और न्यायालय में धूल खाल रही फाइलों की जांच पड़ताल की है। तत्पश्चात मामले की जांच की गई और न्यायालय में तैनात तीन कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया गया । और बाकी पांच कर्मचारियों के खिलाफ जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
हम आपको बताते चलें कि जालौन के मुख्यालय उरई स्थित जिला न्यायालय के जिला जज अशोक कुमार ने निरीक्षण किया था निरीक्षण के दौरान उन्होंने सीजेएम कोर्ट का भी निरीक्षण किया जहां एक कोने में हजारों फाइलें धूल फांक रही थी । जिला जज ने इन धूल खा रही फाइलों को देखकर वहां पर मौजूद कर्मचारियों से इन्हें खोलने को कहा यह आदेश सुनते ही कर्मचारी हड़बड़ा गए। जिला जज को कर्मचारियों की हड़बड़ाहट से कुछ संदेह हुआ संदेह के चलते उन्होंने सभी फाइलें निकलवाते हुए एक जांच कमेटी गठित कर सभी दस्तावेजों के निरीक्षण के आदेश दिए हैं। गठित की गई जांच कमेटी ने जो रिपोर्ट तैयार कर जिला जज को सौंपी हुआ है काफी चौंकाने वाली थी । धूल खा रहे उन दस्तावेजों में 533 अपराधियों की अपराधिक चार्ट शीट शामिल थी जिन्हें कर्मचारियों ने कोर्ट में जज के पास दाखिल नहीं की थी इन चार्ट सीटों में वर्ष 2011 से लेकर 2020 तक की चार्ट शीट शामिल थी। चार्जशीट दाखिल ना होने की वजह से 167 अपराधियों की कोर्ट में सुनवाई के समय भी निकल चुका है यदि यह कहा जाए कि उन्हें सजा से बचा दिया गया है तो बिल्कुल ही गलत नहीं होगा। इस मामले में जिला जज ने 3 कर्मचारियों को अपराधियों को बचाने के जुर्म में दोषी मानते हुए निलंबित कर दिया है । साथ ही 5 कर्मचारियों पर भी जांच बिठा दी है ।

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