Lifestyle change indianये जो तस्वीर है वो दो भाइयों के बीच बंटवारे के बाद की तस्वीर है। बाप-दादा के घर की देहली को जिस तरह बांटा गया है वह हर गांव-घर परिवार की असलियत को भी दर्शाता है।
*Lifestyle change*
दरअसल हम गांव के लोग जितने खुशहाल दिखते हैं उतने होते नहीं है। जमीनों के केस, पानी के केस, खेत-मेढ के केस, रास्ते के केस, मुआवजे के केस, व्याह शादी के झगढे, दीवार के केस,चबूतरे के केस , जानवरों के झगड़े ,बच्चों के झगड़े आपसी मनमुटाव, चुनावी रंजिशों ने समाज को खोखला कर भाईचारे में दीमग लगा दी है। जीतेगा प्रत्याशी लेकिन झगड़ा वोटरों में देखने को मिलेगा ।
No respect
अब गांव या शहर वो नहीं रहे कि जब यात्रा के दौरान बस मे महिलाओं को देखते ही सीट खाली कर देते थे बच्चे। दो चार थप्पड गलती पर किसी बुजुर्ग या ताऊ ने टेक दिए तो इश्यू नहीं बनता था तब। लेकिन यदि आज के जमाने थप्पड़ मारना तो दूर की बात बुजुर्ग सही बात बच्चों से नहीं कह सकते यह हालत बन चुके ।अब हम पूरी तरह बंटे हुए लोग हैं। गांव में अब एक दूसरे के उपलब्धियों का सम्मान करने वाले, प्यार से सिर पर हाथ रखने वाले लोग संभवत अब मिलने मुश्किल हैं। अब तो अक्सर गांव या शहर में लोग एक दूसरे से जलने वाले एक दूसरे की टांग खींचने वाले मिलेंगे।
इस पोस्ट के माध्यम से मैं अपने साथ हुए एक अनुभव को मैं यहां आपको बताना चाहूंगा कि अभी पिछले उत्तर प्रदेश में 2021 के ग्राम पंचायत चुनाव में मैंने अपने गांव में क्या महसूस किया है ।
हालात इस कदर खराब है कि एक पढ़े-लिखे सज्जन ने यहां तक कहा कि अगर कुशवाहा जी फला व्यक्ति को वोट देगे तो हम उसे कभी नहीं देंगे। इतनी नफरत कहां से आई है लोगों में ये सोचने और चिंतन का विषय है। गांवों में कितने मर्डर होते हैं, कितने झगडे होते हैं और कितने केस अदालतों व संवैधानिक संस्थाओं में लंबित है इसकी कल्पना भी भयावह है। ग्राम पंचायत चुनाव में मैंने एक बात महसूस की है कि लोग प्रत्याशी की योग्यता देखकर मतदान नहीं करते बल्कि एक दूसरे को नीचा दिखाने के लिए मतदान करते हैं। आप सभी ने एक कहावत तो भली-भांति सुनी ही होगी की चाय से ज्यादा केतली गर्म होती है। इस बात को मैंने ग्राम पंचायत चुनाव में महसूस किया है कि किसी व्यक्ति ने यदि प्रत्याशी को वोट नहीं दिया तो प्रत्याशी को कदापि बुराई नहीं होती वह तो यह कह कर बात टाल देता है कि हमारी किस्मत में प्रधानी नहीं थी। लेकिन उनके समर्थक अपनी मर्यादा भूल कर लड़ने झगड़ने मारने मरने तक की उतारू हो जाते हैं।
Joint family ,Lifestyle change region
संयुक्त परिवार अब गांवों में गिने चुने ही देखने को मिलेंगे। पहले जब कहीं घर पर कोई मेहमान आता था तो उन्हें दूध लस्सी और घर की बनी मिठाई से उनका स्वागत सत्कार किया जाता था लेकिन समय के बदलाव के साथ अब लस्सी-दूध जगह वहां भी डयू कोका पिलाई जाने लगी है। शायद बंटवारा केवल भारत का नहीं हुआ था, आजादी के बाद हमारा समाज भी बंटा है। और शायद अब हम भरपाई की सीमाओं से भी अब दूर आ गए हैं। अब तो वक्त ही तय करेगा कि हम और कितना बंटेंगे।
Life style change big region
आजादी के बाद शिक्षा का स्तर भी बढ़ा लोग घरों से बाहर निकले देश विदेशों में नाम कमाया और पश्चिमी सभ्यता को अपनाते करें जिससे समाज में माहौल गंदा होता जा रहा है। उपरोक्त सभी परिवर्तन लाने टीवी सीरियलों का सबसे महत्वपूर्ण योगदान है । पहले घरों में रामायण पढ़ी जाती थी गीता पढ़ी जाती थी भागवत पढ़ी जाती थी लेकिन अब टीवी सीरियल में देखी जाती हैं । उन्हीं का प्रभाव है कि लोग अलग होते जा रहे हैं ।भाइयों भाइयों में प्यार नहीं देवरानी जेठानी एक दूसरे को नीचा दिखाने में लगी है । कई जगह तो ऐसा भी देखने को मिला है कि शादी के 4 दिन बाद ही उन्होंने अपने आपको पूरे परिवार से अलग कर लिया है। और जब से मोबाइल फोन शुरू हो का चलन बढ़ गया है तब से घर की हर छोटी मोटी बात घर की चारदीवारी से बाहर होते हुए देर नहीं लगती है इसी वजह से घर में बटवारे हो रहे हैं ।गहराई से सोचें तो ये बात सही लगती है कि पढे लिखे लोग हर चीज को मुनाफे से तोलते हैं और ये बात समाज को तोड रही है।
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